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अपने सामान्य इन्वर्टर को सौर इन्वर्टर में बदलें – लाभ और प्रक्रिया

इन्वर्टर एक ऐसा उपकरण है जो बिजली के बैककप के लिए उपयोग में आते है | सामान्य इन्वर्टर ग्रिड से बिजली लेता है, जब की सोलर इन्वर्टर सौर ऊर्जा से | दोनों इन्वर्टर के कार्यप्रणाली और उपयोगिता में महत्वपूर्ण अंतर है | सोलर इन्वर्टर सूर्य की रौशनी से बिजली उत्पन्न करता है, जिस से बिजली बिल में कमी होती है |

सोलर इन्वर्टर के अनेक लाभ है | इसी वजह से सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलना लाभदायक होता है | सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलाव करके आप नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत का उपयोग कर सकते है | आइए इस लेख द्वारा हम सोलर इन्वर्टर क्या है और सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में कैसे बदले इसकी जानकारी लेंगे, ताकि आप सोलर इन्वर्टर कनेक्शन के लाभ उठा सके |

1. सोलर इन्वर्टर क्या है

सोलर इन्वर्टर DC (डायरेक्ट करंट) को AC (अलटरनेटिंग करंट में बदलने का काम करता है | जब तक ऊर्जा AC ना हो, तब तक उसे घरेलु और व्यावसायिक उपयोग में नहीं ला सकते | इसी वजह से सोलर इन्वर्टर की भूमिका महत्वपूर्ण है |

1.1 कैसे सोलर इन्वर्टर बिजली उत्पादन में मदद करता है?

  • यह सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलने में सक्षम होता है।
  • ग्रिड पर निर्भरता कम करता है जिस से जिस से बिजली बचत होती है।
  • यह स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है, जिससे प्रदूषण कम होता है।

2. सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलने के आवश्यक घटक

2.1. सोलर पैनल

सोलर पैनल सूर्य की रौशनी को विद्युत् ऊर्जा में बदलता है | सोलर पैनल के फोटोवोल्टाइक सेल DC (डाइरेक्ट करंट) उत्पन्न करता है | इसे AC में रूपांतरित करने के लिए इन्वर्टर आवश्यक होता है |

2.1. सोलर चार्ज कंट्रोलर और इसका महत्व

इस उपकरण से बैटरी को चार्ज करते है और बिजली प्रवाह को नियंत्रित  है | यह उपकरण अत्यधिक चार्जिंग और डिस्चार्जिंग से बचाता है और बैटरी की आयु बढ़ाता है | इस में दो प्रकार रहते है: MPPT (Maximum Power Point Tracking) और PWM (Pulse Width Modulation) | दोनों में से MPPT अधिक कुशल होता है |

2.2. बैटरी (ऑफ ग्रिड या हाइब्रिड सिस्टम हो तो)

बैटरी में संग्रहीत ऊर्जा बिजली कटौती के दौरान काम आती है | लिथियम-आयन और लिड-एसिड बैटरीयां एक लोकप्रिय विकल्प है |

2.3. अन्य आवश्यक उपकरण (वायरिंग, माउंटिंग आदि)

  • वायरिंग : सोलर पैनल, चार्ज कंट्रोलर, बैटरी और इन्वर्टर के बीच उचित कनेक्शन सुनिश्चित करना आवश्यक है | उस के लिए उच्च गुणवत्ता वाली वायरिंग आवश्यक होती है।
  • माउंटिंग स्ट्रक्चर : सोलर पैनल को सही दिशा और कोन में लगाना आवश्यक है | इस के लिए मजबूत माउंटिंग स्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है।
  • सुरक्षा उपकरण : सोलर सिस्टम की सुरक्षा के लिए सर्किट ब्रेकर और फ्यूज जैसे उपकरण आवश्यक होते हैं।

3. सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलने की प्रक्रिया

सामान्य इन्वर्टर  इन्वर्टर में बदलने की प्रक्रिया सरल है | आइए इस की चरणबद्ध तरीके से जानकारी लेते है |

3.1. सबसे पहले अपने इन्वर्टर में सोलर चार्ज कंट्रोलर जोड़े | इस से नियंत्रक बिजली प्रवाह का प्रबंधन होता है और बैटरी को अतयधिक चार्ज होने से बचाता है |

3.2. दूसरे चरण में सोलर पैनल सेट करे और उन्हें चार्ज कंट्रोलर से जोड़े |

3.3. फिर बैटरी बैंक जोड़े और सभी वायरिंग ठीक से जुड़ी हुई है, यह सुनिश्चित करें |

3.4. सोलर में बदलाव करते दरम्यान सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है | बिजली को डिस्कनेक्ट करे | आवश्यक सुरक्षा उपकरण पहनें | सेटअप को सही तरीके से ग्राउंड करें और किसी दुर्घटना से बचें |

3.5. सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलते समय सही उपकरण चुनें | आपकी ऊर्जा आवश्यकता, छत की उपलब्धता और बजट को ध्यान में रखें |

4. MPPT और PWM चार्ज कंट्रोलर में अंतर

बैटरी को ओवरचार्ज या डिस्चार्ज बचाने हेतू चार्ज कंट्रोलर आवश्यक है | MPPT (Maximum Power Point Tracking) और PWM (Pulse Width Modulation) चार्ज कंट्रोलर लोकप्रिय है | ये सौर ऊर्जा प्रणाली में बैटरी चार्जिंग को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी है |

MPPT कंट्रोलर अधिकतम ऊर्जा निकालने में सक्षम होता है, जो 30% तक अधिक दक्षता प्रदान करता है | PWM कंट्रोलर कम दक्षता प्रदान करता है, लेकिन सरल और सस्ता होता है।

इसलिए MPPT बड़े सिस्टम के लिए बेहतर होता है, जबकि PWM छोटे और कम लागत वाले सिस्टम के लिए उपयुक्त होता है।

5. सोलर इन्वर्टर में बदलने के फायदे

सामान्य इन्वर्टर से सोलर इन्वर्टर में बदलने के लाभ इस प्रकार है :

5.1. बिजली की बचत

5.2. नया इन्वर्टर खरीदने की आवश्यकता नहीं | आप नये सोलर इन्वर्टर की कीमत बचा सकते है |

5.3. सोलर बैटरी की रक्षा होती है और उसकी आयु बढ़ती है

6. रखरखाव और देखभाल के टिप्स

6.1. सोलर इन्वर्टर की नियमित सफाई करें |

6.2. वेंटिलेशन बनाए रखें ।

6.3. ढीले कनेक्शन की जांच करें।

6.4. कूलिंग सिस्टम की निगरानी करें ।

6.5. सॉफ़्टवेयर नियमित रूप से अपडेट करें ।

6.6. बैटरी का रखरखाव करें | बैटरी के चार्ज स्तर और टर्मिनल की सफाई पर ध्यान दें।

6.7. सुरक्षा उपकरणों की जांच करें |

6.8. सर्किट ब्रेकर और फ्यूज को समय-समय पर जांचें ।

निष्कर्ष

सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर में बदलना एक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है। इस से बिजली बिल में बचत होती है और स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलता है | इस परिवर्तन से ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ती है और दीर्घकालिक निवेश का लाभ उठा सकते है |

यह बदलाव बिजली की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी होती है | इन्हीं कारणों से सामान्य इन्वर्टर तो सोलर इन्वर्टर में बदलना एक समज़दारी भरा निर्णय माना जा सकता है |

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