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क्या बारिश के मौसम में सोलर पैनल काम करते हैं?

आज सौर ऊर्जा की लोकप्रियता बढ़ते चरम पर है | सरकारी सबसिडी से आम ग्राहकों का सौर ऊर्जा अपनाना आसान हो गया है | जिन बिजली उपभोक्ताओं ने सौर संयंत्र स्थापित किए है, वह सौर ऊर्जा के लाभों से काफी प्रभावित है | इन लाभों में अविरत बिजली, पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा, बिजली बिल में कटौती, बिजली के प्रति आत्मनिर्भरता और वास्तु की कीमत में वृद्धि, ऐसे लाभ शामिल है | इन लाभों को पाने के लिए अनेक ग्राहक सौर ऊर्जा को अपनाना चाहते है |

सौर पैनल सूर्य की रोशनी को अवशोषित करके ऊर्जा निर्माण करते है | इस लिए “क्या सौर पैनल बारिश में काम करते हैं?” यह प्रश्न स्वाभाविक है | जिन ग्राहकों को सौर संयंत्र स्थापित करना है, इन्हें यह प्रश्न सताता रहता है | बारिश में सौर पैनल काम कर सकते है या नहीं इस विषय पर यह लेख प्रकाश डालता है | आइए, इस प्रश्न पर विस्तार से जानकारी लेते है |

क्या सौर पैनल बारिश में काम करते हैं?

सूर्य के प्रकाश पर निर्भरता

सौर पैनल सूर्य की रोशनी को इलेक्ट्रिकल ऊर्जा में रूपांतरित करते है, जिससे वे बिजली उत्पन्न करते है

आम मौसम में, जब बरसात का मौसम नहीं होता, सौर पैनल अधिक प्रभाशाली होते है, क्योंकि ऐसे मौसम में पैनलों को अधिक ऊर्जा मिलती है |

हालाँकि, बारिश के दौरान बादल सूर्यप्रकाश की तीव्रता कम हो जाती है | इससे सौर पैनलों की उत्पादन क्षमता घट जाती है | इसके अलावा, पानी की बूंदें या कीचड़ पैनलों की सतह पर जम जाती है, जो प्रकाश के अपवर्तन में बाधा डालते है, जिससे पैनल की कार्यक्षमता और कम करता है |

क्षमता पर प्रभाव

क्या सौर पैनल बारिश में काम कर सकते हैं? बिलकुल कर सकते है | लेकिन पूर्ण कार्यक्षमता से नहीं | बारिश में सौर पैनलों की क्षमता औसतन 10-20% तक कम हो जाती है | इसकी वजह यह है की सीधी सूर्य किरणें बाधित होती हैं | बिना बारिश केवल बादल वाले दिनों में सौर पैनलों की क्षमता 30-50% तक रहती है, क्योंकि सौर पैनल डिफ्यूज़ रोशनी (छानकर आई धूप) से भी ऊर्जा निर्माण कर सकते है |

उदाहरण के तौर पर 1 kWh का सोलर सिस्टम लेते है | यह बारिश में भी लगभग 4–5 यूनिट प्रति दिन उत्पादन कर सकता है | मतलब ऊर्जा का निर्माण होता है, लेकिन धीमी गति से |

बारिश के मौसम में सोलर ऊर्जा उत्पादन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव

प्रकाश परावर्तन में बढ़ोतरी या रुकावट

बारिश में सौर पैनल की कार्यक्षमता कई स्तरों पर बाधित होती है | बारिश की बुँदे धीरे धीरे सौर पैनल की सतह पर जम जाती है | यह सूर्यप्रकाश को परावर्तित भी कर सकते है या अवरुद्ध भी कर सकते है | भारी बारिश में परावर्तन और अवरोध अधिक होता है और प्रकाश का काफी हिस्सा सौर पैनल तक नहीं पहुँचता | फलस्वरूप, फोटोवोल्टाइक सेल्स को सूर्य की रोशनी कम मिलती है और ऊर्जा निर्माण की क्षमता घटती है |

तूफानों के प्रति संवेदनशीलता

तेज हवाएं और आंधी-तूफ़ान पैनलों की संरचना या माउंटिंग सिस्टम पे दबाव बढ़ाते है | यदि सौर पैनलों को ठीक से एंकर नहीं किया हो, तो वे ढीले पड़ सकते है, उखड़ भी सकते है, या टूट भी सकते है | इससे बिजली निर्माण पर भरी मात्रा में असर होता है और कम उत्पादन होता है |

हालांकि, सामान्य बारिश और माध्यम हवाओं से सोलर पैनलों को कोई नुकसान नहीं होता |

अन्य पर्यावरणीय प्रभाव

बारिश होने के बाद अनेक प्रकार की गंदगी पैनल पर जम सकती है, जैसे पक्षियों का मल, गीली धूल या पत्तियाँ वगैरा | इस गंदगी से सौर पैनलों को सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करने में बाधा आती है | यदि इस गंदगी को लम्बे समय तक साफ नहीं किया तो सौर पैनलों की कार्यक्षमता कम हो सकती है | इसलिए बारिश में सौर पैनल का काम आदर्श तरीके से पाने के लिए इन्हें समय-समय पर साफ़-सुथरा रखना जरुरी है |

निष्कर्ष

बारिश में भी सौर पैनल काम करते है, लेकिन उनकी ऊर्जा निर्माण की क्षमता और गति धीमी हो जाती है | बादलों के कारण सूर्यप्रकाश की तीव्रता कम हो जाती है | बारिश की बुंदे और सौर पैनलों की सतह पे जमा पानी, सूर्य प्रकाश के परावर्तन में बाधा डालती है | भारी बारिश और तूफानों में संरचनात्मक ढांचा को नुकसान होने का डर रहता है |

लेकिन इतनी चुनौतियों के बावजूद सौर ऊर्जा आज भी एक विश्वसनीय, पर्यावरण अनुकूल, दीर्घकालिक और किफायती विकल्प है | आधुनिक सौर पैनल की डिज़ाइन और बेहतर तकनीक, बारिश के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकती है |

आज की बढ़ती बिजली की मांग के दिनों में, सौर ऊर्जा सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की ज़रूरत है | आपको सिर्फ एक बार निवेश करना है और अगले 20-25 सालों तक सौर ऊर्जा का लाभ उठाने है |

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